खास आपके लिए

[latest][slideshow]

"काम-वाली" और "काम-वाले" में फर्क क्यों आंटी जी?

अक्सर अपने आस-पास हो रही बाते मुझे भाती नहीं है... फिर मेरे मष्तिष्क में मंथन चालू हो जाता है.. जैसे आज की ही बात ले लीजिए.. पड़ोस की कुछ आंटियां चर्चा कर रहीं थीं कि कैसे जब वो किसी पुरुष को घर का कामकाज करते देखतीं हैं तो उन्हें बड़ा अटपटा लगता है..

"काम-वाली" और "काम-वाले"  में फर्क क्यों आंटी जी?

इत्तेफाक से मेरे कान थोड़े तेज हैं.. तो मैंने उन आंटियों की इस गंभीर विषय पर चर्चा सुन ली.. और फिर शुरू हुआ मष्तिष्क में मंथन.. मैं उन आंटियों को ये बताना चाहती थी कि मुझे और मेरे भाई को मम्मी ने घर के सारे काम सिखाए.. ऐसा कभी नहीं हुआ कि मैं लड़की हूं तो मम्मी ने झाड़ू-पोछा, खाना, और बरतन केवल मुझे सिखाया.. यहां तक की जब हम छोटे थे और मां घर में नहीं रहती थी तो भईया ही झाड़ू-पोछा लगाया करता था.. मम्मी का कहना था कि घर के काम सबको आने चाहिए..


काश मैं आंटी को ये बात बता पाती.. पूछती उनसे कि ऐसा क्यों कि जब कोई महिला घर का काम करती है तो लोगों को अटपटा नहीं लगता.. यहां तक कि बाहर कामवाली के तौर पर करती है, तो भी लोगों को अजीब नहीं लगता.. लेकिन जब कोई पुरुष अपनी मर्जी से घर का काम करता है.. या फिर खाना बनाता है.. तो वो उन्हें बड़ा अटपटा लगता है... ऐसा क्यों?


समाज की किचकिच यही तो है... और ऐसी आंटियां भरपूर सहयोग करती हैं ब्रेन वॉश करने में.. खासकर छोटे शहरों में तो और हद्द मच रखी है.. अगर कोई पुरुष अपनी मरजी से घर का काम कर रहा होता है.. तो काम कर रहे उस पुरुष के दोस्त, रिश्तेदार और मोहल्ले वालों की 10 बातें.. जैसे-- अरे वो तो पत्नी का गुलाम है... वह तो मुंह चोर है, अपनी घरवाली से डरता है.. ब्लाह-ब्लाह..


मैं अगर आंटियों की उस चर्चा का हिस्सा होती तो पक्का मेरे और आंटी के बीच कहा-सुनी हो जाती.. और फिर लोग मुझे ही बद्तमीज कहते.. कहते कि बड़ों से बात करने की तमीज नहीं है.. इसलिए जो वहां नहीं कह पाई.. यहां कह रहीं हूं.. आंटी से मिलती-जुलती सोच रखने वाले तो पक्का खिसिया जाएंगे.. लेकिन मुझे क्या.. मुझे अपना मन की बात तो रखनी ही है...


तो आंटी जी.. एक बात बताइए.. जब आप बड़े-बड़े होटलों में जाती हैं.. तो अक्सर आपको काम करने वाले पुरुष दिखते होंगे.. क्या तब भी आपको अजीब लगता है.. और आप वहां से उठ कर चली जाती हैं? क्योंकि वेटर को तो लोग सामान्य नजरों से देखते है.. जाहिर है आप भी देखती होंगी.. तो अगर कोई पुरुष घर का काम करे तो वो जोरू का गुलाम कैसे?


आंटी जी.. होटलों में अक्सर पुरुष शेफ ही होते हैं.. आप तो बड़े मजे से उनके हाथ का खाना खाती होंगी.. तारीफ भी करती होंगी.. लेकिन जब वही पुरुष घरों में मेड के तौर पर काम करना चाहे तो आपसे गवांरा नहीं.. आप जैसे लोग तो उनको नौकरी पर भी नहीं रखना चाहते.. जो अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए ये काम खुद चुनते है..


और अगर किसी ने काम में रख भी लिया.. तो आपकी इस सोच को सलाम कि ये लड़का कैसे घरेलू काम अच्छी तरह से कर पाता होगा.. ये तो लड़का है.. आप उसके काम को छोटा बताने लग जाती हैं.. पड़ोसी से लेकर राशन वाले भइया तक ताना मार देते हैं... आप लोग ये भूल जाते हैं कि बेरोजगार होने से तो अच्छा है कि वह काम कर रहा है.. और आर्थिक रूप से मजबूत हो रहा है.. 


आंटी जी आप जैसे लोग ये चाहते हैं कि भले पुरुष कोई भी दूसरा काम कर लें लेकिन घर का काम न करे.. न ही कामवाली बाई के जैसे लोगों के घरों में बर्तन न साफ करे... जिन लोगों को पुरुषों को सोफे पर बैठकर टीवी और मोबाइल देखते हुए महिलाओं को आदेश देते हुए देखने की आदत है उन्हें किसी लड़के का इस तरह रसोई में काम करना अपने शान के खिलाफ लगता है..

No comments:

Please do not enter any spam link in the comment

People's Corner

[people][stack]

Travel corner

[travel][grids]

Movie Corner

[movie][btop]

Instagram Feed