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क्या आप भी बैठे-बैठे चार्ज हो जाते हैं ?

बेड पर बैठी काम कर रही थी.. काम करते-करते  इतना चार्ज हो गई कि उठी तो जोर का करंट लगा..

क्या आप भी बैठे-बैठे चार्ज हो जाते हैं ?

बेशक आपके साथ भी इस सीजन में ऐसा हो रहा होगा.. कुर्सी छूते वक्त, कपड़े उतारते या ब्लैंकेट खींचते वक्त.. करंट सा लगता होगा.. कभी हल्का और कई बार बहुत तेज.. इतना कि नाक से खून आने लगता है.. और त्वचा सूख जाने, होठ के फटने और उससे ब्लड आने की शिकायतें भी हैं.. इतना सब हो रहा था तो हमने सोचा पता लगाते हैं कि आखिर ये अचानक से क्या हो रहा है..


क्योंकि सभी लोग अपनी-अपनी समझ से इसका कारण बता रहे थे.. तो असल कारण क्या है.. ये जानने के लिए रिसर्च की.. आप भी पढ़िए.. जानना चाहते हैं तो..

रिसर्च तो कहती है कि इसकी वजह साइंस से जुड़ी है.. और ऐसा अचानक बिल्कुल नहीं हो रहा है.. पहले भी लोग ऐसे अनुभव से गुजरते रहे हैं.. और आगे भी ये जारी रहेगा..  इसका कारण है हमारे आस-पास परमाणु (एटम) पार्टिकल्स का होना... एटम में प्रोटोन-न्यूट्रॉन और इलेट्रॉन होते हैं.. इनका संतुलन बना रहता है.. लेकिन जब मौसम की वजह से इसका संतुलन बिगड़ता है.. तब ही हमें करंट लगता है या ड्राइनेस का अहसास होता है..


किसी-किसी मौसम में हवा के अंदर की ह्यूमिडिटी कम होती है.. और उस वक्त किसी भी व्यक्ति के त्वचा के अंदर की कोशिकाएं फट जाती हैं.. कोशिकाओं के फटने के साथ ही नाक से खून आने जैसी शिकायतें देखने को मिलती हैं.. और मौजूदा मौसम में ये आम शिकायत है.. लेकिन इससे डरने की जरूरत बिल्कुल भी नहीं है.. कई लोग पैनिक हो जाते हैं कि कहीं कोई बिमारी तो नहीं हो गई.. तो चिंता की कोई बात नहीं.. ये नर्मल है..

स्टेटिक इलेक्ट्रीसिटी में दो ऑब्जेक्ट के घर्षण से इलेट्रॉन्स बनते हैं. एक ऑब्जेक्ट से निकलने वाला इलेट्रॉन्स ज्यादा पॉजिटिव होता है और दूसरे ऑब्जेक्ट से निकलने वाला इलेट्रॉन ज्यादा निगेटिव चार्ज होता है और यही इलेट्रॉन कंडक्टर के संपर्क में आते ही झटका देता है. अगर हम शरीर के एटम के भीतर देखें तो प्रोटोन-न्यूट्रॉन का अपना न्यूक्लियस है. न्यूक्लियस के आसपास इलेक्ट्रान भी अपने केंद्र में एक्टिव है. जब हवा से पर्याप्त नमी नहीं मिलती है तो यह त्वचा की सतह पर जमा होने लगता है.


मौजूदा मौसम में घर में स्लीपर पहने हुए, सोफे या कुर्सी पर बैठे या बेड पर लेटे रहने के दौरान शरीर के नेगेटिवली चार्ज इलेक्ट्रान त्वचा की सतह पर आकर इकट्ठा होते रहते हैं. फिर जैसे ही ये किसी कंडक्टर के संपर्क में (नल की टोटी पकड़ने, खिड़की छूने, ग्लास पकड़ने आदि) आते हैं बिजली का झटका लगने जैसा महसूस होता है..लेकिन  वक्त के साथ ये चीज ख़त्म होती जाती है.. 


बस इस वक्त कोशिश इतनी करें कि अपने शरीर में नमीं बनाएं रखें.. त्वचा पर लोशन लगाएं.. पानी ज्यादा मात्रा में पिएं.. और बाहरी हवा और लू से खुद को बचाएं.. बाकी समय के साथ ये सारी चीजें होना बंद हो जाएंगी.. 

1 comment:

  1. Nicely explained in simple language but with good essence of Science.

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