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सोशल मीडिया "ADDICTION" आपकी "MENTAL HEALTH" ले डूबेगा..

गुलामी तो खून में है हमारी.. पहले अंग्रेजों की करते थे.. अब सोशल मीडिया की..

सोशल मीडिया "ADDICTION" आपकी "MENTAL HEALTH" ले डूबेगा..

कितनी अजीब बात है न... आजकल हम अपने किसी भी सवाल का जवाब पाने के लिए सीधे सोशल मीडिया की तरफ दौड़ लगा देते हैं.. कहीं से कुछ सुना तो तुरंत ट्विटर और फेसबुक खोला.. ये जानने के लिए कि पूरा मामला क्या है?.. और इतना ही नहीं.. सोशल मीडिया पर जवाब भी हमें अलग-अलग तरह के मिलते हैं.. लेकिन हमारी मानसिकता हमें हमारे सवाल के जवाब को ढूढ़ने में मदद करती है..


अब सवाल ये है कि क्या वो मानसिकता हमारे लिए ठीक है?


सोशल मीडिया पर सवाल-जवाब के घेरे में हम ये भूल जाते हैं कि इसका हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ रहा है... चाहे कोविड की वैक्सीनेशन का टॉपिक हो या हाल ही में रिहाना का ट्वीट.. या फिर किसान आंदोलन... हम अपनी लाइफ का ज्यादा समय सोशल मीडिया पर जवाब ढूढ़ने में बिता रहे हैं और यही सच है.. आप भी मेरी इस बात से सहमत जरूर होंगे..


लेकिन ये बात हम कर क्यों रहे हैं.. या मैं आज ये ब्लॉग क्यों लिख रही हूं.. वो इसलिए कि हमें ये समझने की जरूरत है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स हमारे खराब स्वास्थ्य का बहुत बड़ा कारण बन सकती है.. और इसकी वजह से आपको एंग्जायटी, डिप्रेशन, स्ट्रेस, अनिंद्रा, पैनिक अटैक हो सकते हैं...


हममे से कई लोग या बच्चे होंगे जिन्हें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का कैसे इस्तेमाल करना है, ये समझना जरूरी है... हम खुद को अपडेट रखना चाहते हैं.. इंफॉर्मेशंस से इन्फ्लुएंस्ड होना चाहते है.. लेकिन बहोत ज्यादा इनफॉर्मेशन प्रॉसेस करने के लिए उतनी ही कैपेसिटी भी होनी चाहिए.. और जब हम अपनी कैपिसिटी से ज्यादा समझने की कोशिश करते हैं, तब हम खुद के लिए प्रॉब्लम क्रिएट करते हैं..


और एक सवाल खुद से भी पूछिए कि खाली समय में अक्सर आप आजकल क्या करते हैं?


इस सवाल का जवाब तो वैसे आपके पास होगा ही, लेकिन मेरे पास भी है.. खाली समय में हम अक्सर मोबाइल यूज करते हैं या तो गेम खेल लिया करते हैं, या फिर ऑनलाइन शॉपिंग कर लिया, चैटिंग कर ली, इंस्टाग्राम या फेसबुक यूज कर लेते हैं.. कोई कैटिगरी ऐसी नहीं है जो सोशल मीडिया के एडिक्शन से आज खुद को रोक पा रही हो... सोने के पहले, जागने के ठीक बाद, मोबाइल फोन चेक करना एडिक्शन बन गया है... लेकिन हम इसे कंट्रोल कर सकते हैं.. अगर आपको पीसफुल लाइफ चाहिए तो एक कोशिश तो बनती ही है..


कुछ 5 टिप्स नीचे लिख रही हूं.. देखिए.. और उनको फॉलो करिए.. शायद आपकी कुछ मदद हो सके..


1-अपने मोबाइल में सीमित ऐप्लिकेशन रखिए..
2-सोने से पहले मोबाइल चेक न कर के किताबें पढ़िए..
3-सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लिमिटेड कमेंट या पोस्ट करिए..
4-गूगल पर हर टॉपिक को सर्च करने से खुद को रोकिए..
5-लैपटॉप या फोन को यूज करने की लिमिट सेट करिए

जानती हूं कि आजकल तो ये 5 बातें फॉलो करना ही बड़ा मुश्किल हो गया है.. लेकिन अगर आप ये छोटी-छोटी बातें फॉलो करेंगे तो मेंटली फिट रहेंगे.. क्योंकि आप अनमोल हैं, आपका जीवन अनमोल है.. तो सोशल मीडिया के इफेक्ट्स और साइड इफेक्ट्स को समझें... इसका नाम ही हमें समझाता है कि ये सोशल कारणों के लिए है.. इसलिए अपनी पर्सनल लाइफ में और भी चीजों को जगह दें..

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