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"Ripped जीन्स", "Ripped सोच" से लाख बेहतर है..

जब कोई मां बच्चों को लेकर अकेले ट्रैवल कर रही होती है.. उसे अपना ख़्याल तो दूर अपनी पैकिंग करने का भी समय नहीं मिलता...

"Ripped जीन्स",  "Ripped सोच"  से लाख बेहतर है..

तो "रावत" जी.. आपने ये कैसे तय कर लिया कि वो औरत जो आपकी को-पैसेंजर थी और अपने दो बच्चों के साथ ट्रैवल कर रही थी उसमें संस्कार नहीं थे.. हो सकता है कि घर से निकलते वक़्त वो जल्दी में रही हो.. या उसे कुछ और न मिला हो और सामने उसे उसकी वही फटी जींस दिख गयी हो और वो उसे ही पहन कर निकल गयी हो.. या फिर बच्चों का कुछ रह न जाए इस चक्कर में वो खुद पर ध्यान ही न दे पाई हो..


हां या फिर एक सबसे बड़ी बात और हो सकती है.. हो सकता है कि उसने जान-बूझ कर वो जींस स्टाइल के लिए पहनी हो.. ये कौन सी रूल-बुक में लिखा है कि जो NGO चलाते हैं वो फटी जींस नहीं पहन सकते हैं.. समाज सेवा के लिए दिल में करुणा और दया भाव का होना ज़रूरी है न कि साड़ी और घूंघट में होना जनाब.. लेकिन आप किसी स्त्री के मां होने की क़ाबिलियत और संस्कार को उसके कपड़ों से तय करने निकले हैं.. वाह रावत जी..


आप जिसे कैंची वाला संस्कार कह कर नकार रहें हैं.. वो शायद किसी की आज़ादी, किसी की अपनी पसंद है.. आप खुद ही RSS में हाफ़-पैंट पहन कर देशभक्ति की शिक्षा ले रहे थे, तब क्या किसी ने आपकी योग्यता या शिक्षा पर सवाल उठाया? तो फिर आपने कैसे किसी मां के संस्कार और उसकी NGO चलाने वाली क्षमता पर शक कर लिया.. सिर्फ एक रिप्ड जीन्स की वजह से..


मैंने देखा है साड़ी में भी स्त्रियों को बदसलूकी करते हुए.. और जींस में अदब से पेश आते हुए.. ये आपकी सोच और आपको मिले आपके अपने संस्कार हैं जो किसी और को ऊपर से नीचे तक पहले निहारते हैं.. और फिर ऐसे कॉमेंट पास करते हैं.. सामने वाले को जाने-समझे बिना उसके संसकारों का चीर हरण करते हैं.. ईश्वर आपको और आप जैसों को सदबुद्धि दे, यही प्रार्थना है आपके लिए.


चाहे वो कोई भी हो.. स्त्री या पुरुष.. किसी के भी संस्कार को उसके कपड़ों से तय करना ठीक नहीं.. ये दर्शाता है कि आप बीमार हैं.. आपकी सोच बीमार है... 

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