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देवभूमि की ओर.. (Part-5) By- Mrinali Srivastava

हिमाचल गए और हिमाचली टोपी नहीं पहनी तो जनाब क्या किया..तो हिमाचल के अपने पांचवे दिन मैंने हिमाचली टोपी के साथ धर्मशाला और मैक्लोडगंज के दर्शन किए..

हिमाचली टोपी..

हिमाचल में आज मेरा पांचवा दिन था.. और मैं पूरी तरह तैयार थी.. क्योंकि आज हमें निकलना था मैक्लोडगंज और धर्मशाला के सफर पर.. तो सुबह-सुबह तैयार होकर मैं और मेरी ट्रैवल पार्टनर निकल चुके थे.. उस दिन मौसम भी काफी अच्छा था.. धूप निकली हुई थी.. ठंड काफी कम थी.. मानों मैसम को भी पता था कि आज हम घुमक्कड़ी लोग सफर पर निकलने वाले हैं.. बाकी मैं ज्यादा नहीं बोलूंगी.. आप तस्वीरें देख लीजिए.. क्योंकि भाईसाब.. तस्वीरें बोलती हैं..


हिमाचल का मौसम
तस्वीरे बोलती हैं

तो सबसे पहले हमारी गाड़ी जाकर रुकी धर्मशाला क्रिकेट स्टेडियम पर.. इस जगह से आप सब वाकिफ होंगे.. फिर भी थोड़ा बता देती हूं.. ये अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम हमारी क्रिकेट टीम के लिये घरेलू मैदान की तरह है.. और इस स्टेडियम को भारत का सबसे खूबसूरत स्टेडियम कहते है.. क्योंकि यहां से प्राकृतिक नजारे साफ देखे जा सकते हैं.. जितने लोग धर्मशाला घूमने जाते हैं.. वो क्रिकेट स्टेडियम जरूर जाते हैं.. तो हम भी पहुंच गए.. लेकिन हमारी बदकिस्मती ये थी कि हम स्टेडियम के अंदर नहीं जा पाए..


कोविड-19 के कहर के चलते स्टेडियम के अंदर टूरिस्टों को जाने की अनुमति नहीं थी.. तो दुख तो काफी हुआ.. लेकिन हमने याद के लिए गेट के बाहर से ही कुछ तस्वीरे ले ली.. नीचे देख सकते हैं..


मै और मेरी ट्रैवल पार्टनर रॉनिका

स्टेडियम तो देख नहीं पाए.. तो हमने अपनी गाड़ी मोड़ी युद्ध स्मारक (War Memorial) की ओर.. जो कि स्टेडियम से चंद कदम दूरी पर है..वॉर मेमोरियल के बारे में बता दूं कि ये जगह धर्मशाला में घूमने वाली खास जगहों में से एक है.. और ये स्मारक खूबसूरत देवदार के जंगलों से घिरी हुई है.. ये स्मारक उन लोगों की याद में बनाई गई है जिन्होंने हमारी मातृभूमि की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ी थी.. मुझे वहां पर काफी सुकून मिला.. हालांकि काफी भीड़ थी.. लेकिन आस-पास के नजारों ने आंखों को काफी सुकून पहुंचाया.. तस्वीरें नीचे हैं.. आप खुद देख लीजिए.. बाकी कभी धर्मशाला जाइएगा.. तो याद रखिएगा.. वॉर मेमोरियल जरूर जाइएगा..


वॉर मेमोरियल
वॉर मेमोरियल
वॉर मेमोरियल
वॉर मेमोरियल
वॉर मेमोरियल

तो धर्मशाला के बाद हमारी गाड़ी चली मैक्लोडगंज की ओर.. वैसे तो आप सब जानते ही होंगे.. लेकिन बता दूं कि मैक्लोडगंज एक ऐसी खूबसूरत जगह है हिमाचल की जो किसी जन्नत से कम नहीं है.. यहां हर तरह के लोग घूमने आते हैं.. कई लोग यहां ट्रिप के लिए आते हैं तो कई लोग भक्ति की तलाश में.. और दलाई लामा के दर्शन भी यहीं होते है.. कई लोग त्रिउंड की ट्रेकिंग के लिए आते हैं.. मतलब ये जगह कभी खाली नहीं मिलती.. हर जगह हर कोने में आपको यात्री दिख ही जाएंगे..


हिमाचल में बसे मैक्लोडगंज में तिब्बत के काफी प्रवासी रहते हैं.. उनके मसीहा, भगवान और गुरु दलाई लामा का घर भी यहीं है.. दुनिया के हर कोने से लोग यहाँ बौद्ध धर्म का पाठ करने आते हैं.. मैं जब वहां के खूबसूरत नजारों का लुफ्त उठा रही थी.. उस दौरान मुझे आस पास काफ़ी सन्यासी दिखे.. जिन्हें मैंने पहली बार देखा था.. हम दलाई लामा मंदिर के अंदर भी गए.. लेकिन एक बात सच बता दूं कि बादलों के बीच बसे इस मंदिर में मुझे एहसास हुआ कि शायद जिंदगी में सुकून का रास्ता यहीं से शुरू होता है.. 


मेक्लोडगंज
मेक्लोडगंज
मेक्लोडगंज

ज्यादा तस्वीरें नहीं ले पाए.. क्योंकि शाम हो चुकी थी.. ठंड काफी बढ़ गई थी.. और हम थक भी काफी गए थे.. तो घर भी निकलना था.. मैक्लोडगंज में घूमने की काफी जगह तो हैं.. लेकिन हम ज्यादा घूम नहीं पाए.. समय के अभाव के कारण.. क्योंकि वहां के लिए कम से कम 2 दिन तो चाहिए ही.. लेकिन उम्मीद है कि मैंने निराश नहीं किया होगा.. आगे सफर अभी बाकी है.. तो बने रहिएगा मेरे साथ.. मेरे सफर में.. धन्यवाद


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