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"थाली में छेद मत करो" भले ही थाली में "जहर" क्यों न परोसा जाए.. (ये मैं नहीं "जया बच्चन" कह रहीं हैं)

"थाली में छेद मत करो" भले ही थाली में "जहर" क्यों न परोसा जाए.. (ये मैं नहीं "जया बच्चन" कह रहीं हैं)

बॉलीवुड की फ़र्स्ट-फ़ैमिली की फ़र्स्ट महिला और संसद में हिंदी सिनेमा की महानायिका रहीं जया बच्चन जी ने ड्रग्स के मुद्दे पर बॉलीवुड की ओर न देखने की गुजारिश की है.. और अब सभी हिपोक्रेसी के देवी-देवता मैं-मैं करके उनके सपोर्ट आ रहे हैं.. जय हो!

जब ड्रग्स के मुद्दे को संसद में बीजेपी सांसद और एक्टर रवि किशन ने उठाया.. तो आप जानते ही होंगे कि जया बच्चन ने क्या कहा.. यही कि “जिस थाली में खाते हैं उसमें छेद करते हैं”... बस उनके ये कहने कि देरी थी.. इसके बाद तो मैं-मैं कहते आए फिल्ममेकर अनुभव सिन्हा.. ये जया जी के बयान को ‘रीढ़ की हड्डी’ कहते हैं.. फिर आईं एक्ट्रेस सोनम कपूर.. ये कहती हैं कि ये जया जी जैसी बनना चाहती हैं.. हेमा मालिनी भी सपोर्ट में उतरीं.. और फिर क्या.. समर्थन के स्वर लिस्ट में जुड़ते जा रहे हैं..


जया बच्चन ने जो थाली में छेद वाली बात कही.. उसे सुनकर तो लग रहा था कि उन्हें काफी तकलीफ हुई है कंगना रनौत और रवि किशन के बॉलीवुड ड्रग्स-माफ़िया के ख़िलाफ़ बोलने से.. मतलब भाईसाब.. एक भले इंसान की तरह सोचिए.. तो उनके कहने का सीधे तौर पर मतलब था कि भले ही ड्रग्स की ज़द में आ कर किसी की जान क्यों न चली गयी हो... या कोई जेल में क्यों न बंद हो.. ड्रग्स और बॉलीवुड तो जय-वीरू की जोड़ी है.. फिर जया जी तो पचास साल से यही सब देखती आयी होंगी..


लेकिन सोचिए.. खुद तो कभी ड्रग्य के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाईं नहीं.. और अब.. जब कोई आवाज़ उठा रहा है.. तो उन्हें हज़म नहीं हो रहा है..

जया जी आपको तो सब सच्चाई मालूम होगी.. जिंदगी कट गई आपकी ये सब देखते-देखते.. अब भी मुंह नहीं खोलेंगी तो कब खोलेंगी जी.. हिपोक्रेसी की देवियों में से एक हैं सोनम कपूर जो कह रहीं थीं की उन्हें बड़ी होकर जया बच्चन बनना है.. ये सिखाएंगी क्या आप उन्हें.. और ये वही सोनम हैं जो कंगना का घर टूटा तो उस पर मुंह से एक शब्द न फूटा.. और ऊपर से आप कहती हैं कि बॉलीवुड को प्रोटेक्शन की ज़रूरत है.. अरे भईया काहे का प्रोटेक्शन.. और किससे?


अब क्या इन सभी ड्रगी ग्रूप्स को y+ सुरक्षा मिलनी चाहिए.. ये कौन हैं? देश का गौरव.. देश की शान.. थोड़े नशेडी निकल गए तो क्या, हीरो हैं हमारे.. सरकार उनको ड्रग्स दे ताकि वो और उनका कारोबार फल-फूल सके.. ये तो वही बात हो गई कि आप सबको इस कीचड़ की आदत सी हो गयी है.. अगर आपको कोई इस कीचड़ से बाहर आने के लिए कहेगा.. तो आप उसको भी उस कीचड़ में उतार लेंगे.. हद्द है मतलब..


शायद आपको डर होगा कि अभी तो बॉलीवुड घरानों से सारा अली खान, श्रद्धा कपूर और एक-दो के नाम सामने आए हैं.. लेकिन कहीं इनके सीनियर्स ने क्या-क्या किया..? पोल पट्टी न खुल जाए.. वैसे तो आप शायद भूल गईं हैं कि ऐसा कौन सा नशा है जो संजय दत्त ने नहीं किया.. फरदीन खान ड्रग्स के मामले में जेल जा चुके हैं.. रणबीर कपूर ने खुद एक इंटरव्यू में ड्रग्स लेने वाली बात कही थी.. कईयों को रिहैब भेजा जा चुका है इलाज के लिए..


मुझे बस एक बात समझाइए कि ये तरह-तरह के नशे जो बॉलीवुड करता है.. ये गैरकानूनी तो उनके लिए भी है न.. क्योंकि बॉलीवुड भारत से अलग तो है नहीं.. फिर समस्या तो पूरे देश की है.. फिर किस हक से बॉलीवुड ड्रग्स के मामले पर आजादी चाहता है.. और कोई सवाल न उठाए.. इसकी मांग क्यों? ऐसा भेदभाव क्यों?

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