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तो कहिए एक बार फिर "नेपोटिज्म जिंदाबाद"

बॉलीवुड के कर्त्ता-धर्ता, पालनहार, करण जौहर ने "गुंजन सक्सेना" के लिए जाह्नवी को क्यों चुना भाई.. अब लोग तो बाते करेंगे ही..

तो कहिए एक बार फिर "नेपोटिज्म जिंदाबाद"

हां और नहीं तो क्या..मतलब मैं यही सोच रही थी कि, क्या सोच कर बॉलीवुड के कर्त्ता-धर्ता, पालनहार, करण जौहर ने गुंजन सक्सेना जैसी ब्रेव-हॉर्ट ऑफ़िसर के लिए जाह्नवी कपूर को चुना है.. गुंजन सक्सेना का ट्रेलर देखा.. Netflix पर रिलीज होने वाली है.. और इसकी लीड ऐक्ट्रेस हैं जाह्नवी कपूर..  बाप रे इतनी ख़राब ऐक्टिंग कैसे कर लेतीं हैं ये? मतलब श्री देवी की बेटी होना ही सबकुछ है.. बाकी कुछ नहीं देखा जाएगा.. मने क्या फ़्लैट एक्सप्रेशन के बाद भी उनको फ़िल्में मिलेंगी?

क्यों यार.. ये बात एकदम मेरे सर के ऊपर से निकलती है.. क्या सिर्फ़ ख़ूबसूरत चेहरा और स्टार-किड होना ही काफ़ी है धर्मा प्रोडक्शन की फ़िल्में मिलने के लिए?..  कम से कम गुंजन सक्सेना का ट्रेलर देख कर तो मुझे ऐसा ही लग रहा है. फ़िल्म में जान्हवी कपूर डायलॉग्स ऐसे बोल रहीं हैं जैसे कॉन्स्टिपेशन से पीड़ित हैं.. ऊपर से एक और चीज़ जो मैंने नोटिस किया है ट्रेलर देख कर वो ये कि, बजाय उनको डायलॉग देने के उनके फ़्लैट चेहरे को हर बार फूल स्क्रीन डायरेक्टर साहेब दिखा रहें हैं.. 

उनको क्या लग रहा है कि टैलेंट विहीन, एक्सप्रेशन-विहीन सुंदर से मुखड़े को दिखा कर दर्शकों को रिझा लेंगे?


आप ने अगर ट्रेलर नोटिस किया होगा.. तो देखा होगा.. आख़िरी सीन में जब जान्हवी ‘फ़ायर’ बोलती हैं न.. उसको देखकर कहीं से भी नहीं लग रहा कि उनके अंदर ग़ुस्सा, आवेग जैसी कोई बात भरी है, क्योंकि वहां तक पहुंचने के लिए उनको जिस क़दर बुली किया गया है.. उसकी आग हमें उस एक शब्द, ‘फ़ायर’ को सुनकर महसूस होनी चाहिए थी.. लेकिन वहां भी वो फ़्लैट ही रह गयी. और डायरेक्टर साहेब को लगा होगा कि वाह, क्या नायाब शॉट दिया है..

करण जौहर साफ समझ आ रहा है कि बोनी कपूर से दोस्ती निभाने की ख़ातिर आपने उनकी बेटी को इस फिल्म में लिया.. मेरे दिमाग़ में अब भी ये बात नहीं घुस रही कि क्यों उनको एयरफ़ोर्स के पायलट का रोल करने को मिला? मतलब मोम जैसी लड़की को टफ रोल देने की क्या मजबूरी रही होगी करण जौहर की.. जह्नवी सच में फ़िल्म के हर सीन में डरी-डरी सी लड़की जैसी दिख रहीं हैं.. ऑफ़िसर तो कहीं से नहीं दिख रहीं..  एक ‘धड़क’ झेली थी हमने.. अभी तक याद है कि कैसे जह्नवी उस फिल्म का गुड़-गोबर किया था.. और अब भक्क.. सत्यानाश कर दिया गुंजन सक्सेना के रोल का..

ट्रेलर देखने के बाद तो मेरा कोई इरादा नहीं है इस फिल्म को झेलने का वैसे.. लेकिन हां फिल्म में पंकज त्रिपाठी हैं और मुक्केबाज़ वाले अपने हीरो भी उनके लिए ये फ़िल्म देखी जा सकती है.. पता नहीं आप मेरी बात से सहमत हैं या नहीं.. लेकिन जह्नवी से सच में कोई उम्मीद मत रखिएगा अगर इस फिल्म को देखने वाले हैं तो.. ये भी हो सकता है कि फ़िल्म हिट कर जाए.. क्योंकि इसमें देशभक्ति, राष्ट्र के लिए कुछ भी कर गुज़रने जैसी बातें हैं, जिससे आम हिंदुस्तानी तुरंत रिलेट कर लेता है.. 

फिल्म में एक डायलॉग है "तुम से नहीं होगा गुंजन".. ये डायलॉग मुझे जाह्नवी पर ज्यादा फिट लगता है.. "तुमसे न होगा जाह्नवी" .. इस फिल्म की अच्छी बात ये है कि फिल्म में वर्क-प्लेस में लड़कियों को ले कर जो राय मर्द रखते हैं.. वो दिखाया गया है.. लड़कियां किसी से कम नहीं ऐसी कई अच्छी बातें हैं.. लेकिन इन सब अच्छी बात को ढक लेंगी जान्हवी कपूर अपनी घटिया ऐक्टिंग से... 

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