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"SOCIAL MEDIA" भीड़ का हथियार

"SOCIAL MEDIA" भीड़ का हथियार

पालघर में हुई दरिंदगी के बारे में सब बात कर रहे हैं. क्यों? क्योंकि इस देश में जब कोई घटना होती है. तो सोशल मीडिया पर एक अलग ही माहौल बन जाता है.


आपने वीडियो तो देख ही ली होगी. सोशल मीडिया इतना तरक्की जो कर चुका है. लेकिन मैं सच बताऊं तो मैं वीडियो आखिरी तक नहीं देख पाई. हां लेकिन ये जरूर देखा वीडियो में कि कुछ लोग जब साधु को मार रहे हैं. तब घटनास्थल पर एक पुलिस अधिकारी मौजूद हैं. बेबस और लाचार खड़े हैं. और स्थति उनके हाथ से बाहर थी.

और ऐसा नहीं है कि पुलिस की लाचारी के नमूमे पहले नहीं देखे. लेकिन ये वाला तो बेहद शर्मनाक था. ऊपर से सवाल ये भी कि जब देश में लॉकडाऊन चल रहा है. तब ऐसा माहौल कैसे बन गया. लोग इकट्ठा कैसे हुए वगैरह-वगैरह.

सब जानते ही हैं कि किसी भी मुद्दे पर सोशल मीडिया के सो-कॉल्ड वकील अपनी-अपनी दलीले अपने स्टेटस के जरिए पेश करने लगते हैं. फिर लोग दो अलग-अलग खेमों में बंट जाते हैं. लोकिन एक वर्ग ऐसा होता हैं जो इस तरह के गंभीर मामलों में चुप्पी साध लेता है. शायद दलील के लिए उनके पास कुछ होता नहीं होगा.

सोशल मीडिया एक हथियार के रूप में काम करती है अब. यहां की भीड़ बिना सड़कों पर उतरे ही नफरत फैलाने का काम कर देती है. और भीड़ से शुरू हुई लड़ाई. कब धर्म का रूप ले लेती है. किसी को कानों कान खबर नहीं होती. और कोई ये मानने को तैयार नहीं होता कि नफरत फैलाने वाली किसी भी तरह की भीड़ का कोई धर्म नहीं होता.

बस बात इतनी है कि हम मीडिया से हैं. तो लोगों के नजरिए जानना और उनका ANALYSIS करने की जरूरत होती है. ऐसे में सबसे अच्छा तरीका है, सोशल मीडिया में इन दो खेमों की एक भीड़ को जोड़े रखना. ये लोग समय-समय पर जहर उगलते रहते हैं. ये लोग अपनी-अपनी मानसिक स्थति के अनुसार किसी भी मुद्दे पर रिएक्शन देते हैं. और जब कोई मुद्दा या बात इनके सिर से ऊपर निकल रही होती है, तो ये प्रॉपर रिसर्च करते हैं. कई तरह के वीडियोज नापते हैं. फिर रिएक्शन देने आते हैं.

जब मामला मुस्लिम का होता है, तब एक खेमा अचानक से एक्टिव हो जाता है. और जब मामला हिंदू का हो तो दूसरा खेमा एक्टिव हो जाता है. और बहुत कम ही ऐसा होता है कि किसी मुद्दे पर दोनों खेमें एक साथ आवाज उठाएं. और उसके ऊपर अगर कोई सेलेब्रिटी किसी मुद्दे पर अपना रिएक्शन दे दें. फिर तो सोने पर सुहागा. वो बेचारे ट्रोलर्स का शिकार हो जाते हैं.

लोकिन एक बात तो साफ है कि देश में फिलहाल इस तरह की घटना का होना किसी भी रूप में सही संकेत नहीं है.


पालघर मामले पर फरहान खान का रिएक्शन.
पालघर मामले पर फरहान खान का रिएक्शन. 

सोशल मीडिया जिस तरह से भीड़ का एक हथियार बनती जा रही है. और अपने-अपने धर्म के लिए लोग जिस तरह से आवाज उठा रहे हैं. ये कब गंभीर रूप ले लेगा पता भी नहीं चलेगा. आप चाहे किसी भी धर्म-जाति के हों. किसी भी पार्टी-पॉलिटिक्स के समर्थक क्यों न हो. आपमें इतनी हिम्मत तो होनी चाहिए कि जो गलत है, उसे गलत कह सकें. और जो सही है उसे सही कह सकें. 

STAY HOME STAY SAFE

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