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आबाद रहे वो गांव मेरा..जहां लौट के वापस जा न सका (PULWAMA ATTACK)

ओ वतना वे मेरे वतना वे.. तेरा मेरा प्यार निराला था.. कुर्बान हुआ तेरी अस्मत पे.. मैं कितना नसीबों वाला था.. 

आबाद रहे वो गांव मेरा..जहां लौट के वापस जा न सका (PULWAMA ATTACK)

ये चंद लाइनें उन जवानों की तरफ से.. जो पुलवामा हमले में शहीद हुए.. जरूरी नहीं कि रातभर जागने वाला मोहब्बत में पड़ा आशिक ही हो.. वो देश से मोहब्बत करने वाला सैनिक भी हो सकता है... आज 14 फरवरी है.. आज का दिन हर हिंदुस्तानी के लिए यादगार है.. नहीं-नहीं सिर्फ इसलिए नहीं कि वैलेंटाइन है.. बल्कि इसलिए क्योंकि बीते साल 14 फरवरी के दिन कश्मीर के पुलवामा में CRPF काफिले पर चरमपंथी आत्मघाती हमला हुआ था.. 

उस दिन एक तरफ हमारे देश के कुछ जवान अपने प्यार का इजहार कर रहे थे.. साथ जीने-मरने की कसम खा रहे थे.. वहीं दूसरी तरफ भारत मां के प्यार में 40 वीर सपूत चुपचाप अपनी जान न्योछावर कर चले थे.. लेकिन पुलवामा में हुई इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद भारतीय युवाओं के लिए 14 फरवरी के मायने काफी हद तक बदल गए थे.. 

खैर.. आज से उस दिल दहला देने वाली घटना को एक साल हो गए हैं.. आज पुलवामा हमले की बरसी पर देश के अलग-अलग हिस्सों पर तरह-तरह के आयोजन हो रहे हैं.. और हमले में शहीद हुए CRPF के 40 जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए याद किया जा रहा है.. 

कहते हैं कि हम तब तक उन हालातों को समझ नहीं पाते.. जब तक वो हालात हम पर न गुजर रहे हों.. लेकिन जब पुलवामा हमले में हमारे जवान शहीद हुए तो पूरा देश शोक में था.. और उनके घर के हालात सभी ने समझे.. आज भी उन शहीद जवानों को याद किया जा रहा है.. हालांकि जिंदगी आगे बढ़ती है.. और कुछ दिन बाद तो लोग अपने-अपने कामों में व्यस्त हो जाते हैं.. सरकारें आने वाले चुनावों में बिजी हो जाती है.. 

लेकिन रह जाते हैं तो केवल  घाव.. शहीदों के परिवारों के दिल पर.. और शायद ही कोई होगा जो उन परिवारों के हालातों के बारे में जानने की कोशिश करे.. 


मेरे हिसाब से हम, आप और सरकारें आज तक देश के शहीद जवानों को सही मायने में श्रद्धांजलि नही दे पाए हैं.. शहीदों के परिजनों को सरकारों द्वारा घोषित मुआवजे और सुविधाएं तक नहीं मिलती हैं.. बाकी पूरे साल पुलवामा में हुए हमले की चर्चा होती रहती है.. और चुनाव के वक्त शहीदों के नाम पर सरकारें वोट भी मांगती दिखती है.. 

कई विपक्षी दलों ने सरकार पर सवाल उठाए.. कि एक साल पहले हमले में शहीद हुए जवानों के परिजनों और आश्रितों से सरकारों ने जो वादे किए थे.. वो पूरे हो पाए हैं या नही?. और अगर नहीं हुए तो कब पूरे होंगे ? क्योंकि मीडिया रिपोर्ट्स में बीच-बीच में ऐसी कई ख़बरें आती रही हैं.. कि पुलवामा हमले में शहीद हुए कई जवानों के परिजनों को अब तक सरकारों की ओर से घोषित मुआवज़ा भी पूरी तरह से नहीं मिल पाया है.. 

शायद इसीलिए शहीदों के परिवारों के घाव कभी पूरे नहीं हो पाते.. क्योंकि जब भी उनपर आर्थिक या किसी भी तरह की समस्या आती होगी उन्हें अपना शहीद बेटा याद आ जाता होगा.. अगर मेरी बात से आप सहमत न हों तो अपने घर के आस-पास किसी भी शहीद जवान के घर हो आइए.. और उनके हालातों को जानने की कोशिश कीजिए.. आपका नजरिया खुद बदल जाएगा.. और उनके घाव आपको अपने से लगने लगेंगे... 

एक बार फिर उन शहीदों को नमन...

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